
बच्चे अपने माता-पिता को बहुत प्यार करते हैं पर उनके प्यार की दुनिया इससे भी बड़ी है और उसमें आता है उनके बाबा-दादी,नाना-नानी का प्यार। बाल उनके चांदी से चमचम करते रहते हैं पर दिल एकदम सोने जैसा होता है। जिनको इन चारों का स्नेह मिलता है वे बहुत भाग्यशाली होते हैं। बाबा -दादी अपने स्नेह का खजाना पोते पोतियों पर किस कदर लुटाते हैं उसके कहने के लिए शब्द नहीं। वे भी बच्चों के साथ बच्चा बनकर खूब मटरगश्ती करते हैं ।न वे थकान महसूस करते हैं,न ही उन्हें मानसिक तनाव होता है। नन्हें- मुन्नों की बदौलत उनका खूब मनोरंजन होता है। असल में बच्चे उनकी जान हैं। प्रतीक्षा करते रहते हैं उनके लाडले कब आयें –कब आयें और चेहरे पर सावन उतर आए। दादी- बाबा बिना किसी स्वार्थ के बच्चों से प्रेम करते हैं ।उनपर आँख मींचकर विश्वास किया जा सकता है। इसके बदले वे हमसे कुछ नहीं चाहते। सिवाय दो मीठे बोल के और मासूमों का साथ। उनके पास अनुभवों का भंडार होता है जो उपहार स्वरूप समय- समय पर बच्चों को बांटते रहते हैं । ये उपहार बड़े कीमती होते हैं,पैसे से नहीं खरीदे जा सकते। इन उपहारों को पाकर वे एक सुशील बालक बनते हैं। सद्गुणों का समावेश होने से उनका चरित्र निर्माण होता है। दादी-बाबा भी उनकी भोली से मुस्कराहट में खो से जाते हैं। बच्चों के माता-पिता तो घर संसार में व्यस्त रहते हैं। पर दादा-दादी पोते-पोतियों में अपने बेटे-बेटी की छवि पा अजीब संतोष से भर जाते हैं। उनके असीम अनुराग को देख पोते-पोती भी उनपर जान छिड़कते हैं। उनकी छड़ी बनने को हमेशा तैयार रहते हैं। दादा-दादी के साथ रहने वाले बच्चे को कभी अकेलापन लगता ही नहीं। किसी दोस्त से झगड़ा हो गया हो या होमवर्क करना हो भागे बाबा के पास। न कोई परेशानी सताती है उन्हें और न किसी उलझन में रहते हैं । ऐसे बच्चे आगे जाकर हर तरह से जीना सीख जाते हैं और मुश्किल से घबराते नहीं। दादी के पास लूडो- कैरम खेलने के लिए समय ही समय।बाबा तो उनकी खातिर घोड़ा भी बन जाते हैं। पीठ पर सवार हो कहते हैं -चल मेरे घोड़े चल रे चल। मैंने ठीक कहाँ न बच्चों !याद आया -वे तो तुम लोगों के सुपर हीरो हैं। शैतानी के कारण जब तुम पर डांट पड़ती हैं तो वे ही आकर तुम्हें बचाते है। बाजार जाकर चॉकलेट -आइसक्रीम खिलाते हैं और कहानियाँ सुनाकर तुम्हारा दिल बहलाते हैं। कभी तुम्हारी बुआ के बचपन की बातें सुनाएँगे तो कभी तुम्हारे पापा की कारिस्तानी की पुड़िया खोल बैठेंगे। तुम्हारे पापा की बातें करते -करते उनके मम्मी-पापा –बाबा, चचेरे भाई बहनों के अनगिनत किस्सों का पिटारा भी खुल पड़ेगा और यह भी मालूम हो जाएगा तुम्हारे परबाबा –परदादी कौन थे? मैंने अपने नाना-नानी -दादी को तो नहीं देखा पर बाबा के साथ रहकर उनका ढेर सा प्यार पाया। वे मेरी स्मृतियों में पूरी तरह से कैद हैं। अब भी लगता है वे मेरे साथ हैं। उनके प्यार की बारिश में भीगी भीगी सी रहती हूँ। इस किताब में मेरे बाबा की प्यारी सी स्मृतियाँ ही स्मृतियाँ हैं।जो मैंने बचपन की छाया में बैठकर लिखी हैं। अब भी उनकी फोटो पर नजर पड़ी तो उसी पर टिक जाती है । उनके साथ बिताया एक एक दिन पन्नों की तरह फड़फड़ाने लगता है। तुम भी जब मेरे बाबा से मुलाक़ात करोगे तो अपने दादी बाबा को याद करने लगोगे—- उनके पास भागे चले जाओगे। हाँ एक मुश्किल आ सकती है। पहले सयुंक्त परिवारों में दादी- बाबा, नाना- नाना के साथ रहना सरल था पर एकल परिवार हो जाने से सब साथ नहीं रह पाते । लेकिन इसका भी उपाय सोचा जा सकता है। घर- घर मोबाइल से बात करना सरल हो गया है। वीडियो कॉल,ईमेल का भी सहारा लिया जा सकता है।बस फट से हो गईं न दादी -बाबा से बातें! सब दूर- दूर, अलग- अलग रहते हैं न । सो छुट्टियों में एक स्थान पर मिलने की योजना बन सकती है । अगर मम्मी-पापा उनके पास नहीं जा सकते तो दादी बाबा को अपने पास बुलाया जा सकता है । अब तो उन्हें गिफ्ट भी भेज सकते हैं। एमेजॉन इंडिया,फिलिप कार्ट,अलीबाबा आदि द्वारा उपहार भेजना बड़ा सरल हो गया है । अपने जन्मदिन पर प्यार की सौगात पाकर वे खिल उठेंगे। जितना वे प्रसन्न रहेंगे उतनी ही उनकी उम्र बढ़ेगी। जितनी उनकी उम्र बढ़ेगी उतने दिन ज्यादा उनका साया तुम्हारे ऊपर रहेगा। फिर देखना दुनिया भर की खुशियाँ तुम्हारे रास्ते में बिछ जाएंगी। लो मैंने तुम्हारी सारी मुश्किलें दूर कर दीं !अब तैयार हो जाओ मेरे बाबा से मिलने के लिए ! पृष्ठ 49 की यह पुस्तक ‘मेरे प्यारे बाबा’केवल बच्चों के लिए है ऐसा तो नहीं कह सकती। बड़े भी इसमें अपना कोना पाकर सुखद अनुभूति से भर उठेंगे —ऐसा मेरा विश्वास है । हाँ पढ़कर जरूर बतायेँ मेरे सुधि पाठक कि बच्चों को बुजुर्गों से जोड़ने का मेरा यह प्रयास कैसा लगा!