इस कथा - संग्रह में प्रेमचंद ने सामाजिक व्यवस्था, धर्म, जाति तथा ठेठ देहाती जीवन का शब्द चित्रण किया है। प्रेमचंद की लगभग सभी रचनाओ में भारतीय गांव की मिटटी की खुशबु आती है। प्रेमचंद ने अपनी कहानियों में भारतीय समाज में व्याप्त रूढ़िवादी परम्परा,अन्धविश्वाश,स्त्रियों पर अत्याचार एवं अन्य सामाजिक विसंगतियो का बहुत ही सहजता से उळ्लेख किया है। बदलते समय के साथ साथ प्रेमचंद की प्रसिद्धि बढ़ती गयी। उनके द्वारा रचित हर रचना को पाठक बहुत ही जिज्ञासा से पढ़ते हैं।