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Jeet Singh
Jeet Singh
Series · 8 books · 1996-2017
By
Surendra Mohan Pathak
,
2015 Jan 01
,
Surender Mohan Pathak
Books in series
#1
दस लाख
1996
वो एक तिजोरीतोड़ था जिसकी मां ने बड़े चाव से उसका नाम जीता रखा था, लेकिन वो जिंदगी में कभी कुछ ना जीता, हमेशा हारा । वो जीत का सपना भी देखता था तो हार पहले दिखाई देती थी । ऐसा शख्स दस लाख की रकम का तलबगार था और उस रकम के आगे उसे अपनी दुनिया खत्म होती दिखाई देती थी । जीत सिंह का का पहला शाहकार ।
#4
खोटा सिक्का
2004
जीता वो सब था जो खुदा के बनाए इंसान को नहीं होना चाहिए था । वो एक हारा हुआ इंसान था जिसका नाम ही जीता था लेकिन जो जिंदगी में कभी कुछ न जीत सका । वो खोटा सिक्का था ।
#6
मिडनाइट क्लब
2008
गोवा से जीते की मदद को आया उसका दोस्त एक ऐसी मुश्किल में पड़ा कि उसकी जान पर बन आई ! ऐसे में जीते ने अपने दोस्त की मदद का बीड़ा उठाया ! वो जीता जिसे कभी कोई हाकिम ठोकर मारता था, कभी कोई वादाशिकन मोहतरमा उसका दिल निकालकर अपनी जूती से मसलती थी तो कभी कोई कामरेड साहब अपने दुश्मन का शिकार करने का जरिया उसे बनाता था ! ये थी जीतसिंह, जीता, की कहानी !
#7
The Colaba Conspiracy
2014
A new novel from the King of Hindi crime fictionJeet Singh's ex-girlfriend Sushmita's rich industrialist husband is brutally stabbed to death. Her stepchildren destroy all evidence of Sushmita's marriage to their slain father, and implicate her in the case along with JeetSingh. Jeet Singh, who is known to be able to open any safe in the country, takes it upon himself to clear their names and solve the murder mystery. Set in Mumbai, Colaba Conspiracy is a whodunit that will keep you guessing all the way.
#8
गोवा गलाटा
2015
"जिस चीज़ की कोई कीमत नहीं, वो मैं हूँ. जिस पेड़ को फल नहीं लगता, वो मैं हूँ. जो ज़र्रा किसी गिनती में नहीं आता, वो मैं हूँ. जिसका होना - न होना एक बराबर हो, वो मैं हूँ. मैं शायद इसलिए सलामत हूँ, क्योंकि मेरा बनाने वाला मेरे गुनाहों की तरफ नहीं देखता, अपनी रहमत की तरफ देखता है." ऐसा ही था जीतसिंह उर्फ़ जीता, जो कभी कुछ न जीता, फिर भी रहा जीता.
#9
मुझसे बुरा कौन
2016
मैं ऊपर वाले से हमेशा दुआ करता हूं कि ऐ खुदा, तू मेरे करमों की तरफ न देख, अपनी रहमतों की तरफ देख. तू जानता है, न मेरे गुनाहों का हिसाब हो सकता है, न तेरी रहमतों का. दोनों समुद्र में उठने वाले बुलबुले हैं, कौन उनकी गिनती कर सकता है. कौन होगा मुझ से बुरा इस शहर में, इस जहान में. फिर भी मैं उस मुबारक घड़ी की बाट जोहता हूं जब तेरा कोई फरिश्ता आ कर मेरे कान में अमृत घोलेगा और बोलेगा - ‘जा तेरे बनाने वाले ने तेरी तमाम खतायें माफ फरमायीं’.
#10
मुझसे बुरा कोई नहीं
2016
मैं हालात का सताया आदमी हूं, नाम का जीता हूं लेकिन आज तक कभी कुछ नहीं जीता. मेरे बनाने वाले ने मेरी तकदीर ही ऐसी उकेरी है कि खुद मुझे इस हकीकत का एहतराम करना पड़ता है कि मुझसे बुरा कोई नहीं. कोई नहीं जिसके प्रारब्ध के पन्नों पर सदा से ही काली स्याही फिरी हो.
#11
Bluffmaster!
2017
Taxi driver Jeet Singh is cruising for fare when a man being tailed by a bunch of goons blocks his way. Entrusting him with a briefcase full of secret, classified government documents to be delivered in lieu of a huge sum to a girl in Jogeshwari, he jumps off the moving taxi. His dead body is found by the railway track in a Mumbai suburb the next morning, while Jeet Singh finds he has nobody to give the briefcase to; the girl died mysteriously the previous night. He opens the briefcase, and a free-for-all for diamonds worth millions is set into motion. From the badshah of crime writing comes another blockbuster of a novel, Diamonds are for All.
Authors
Surendra Mohan Pathak
Author · 132 books
2015 Jan 01
Author · 2 books
Surender Mohan Pathak
Author · 2 books