सुनील को ग्लैमर बॉय की उपाधि देकर, उसकी अताशीश सफलता में पक्षपात का हवाला देकर इन्स्पेक्टर प्रभूदयाल ने एक केस की स्वतंत्र रूप से तहकीकात करने की मांग कर डाली । परिणामस्वरूप उसके सामने थी डबल मर्डर की एक पेचीदा, मकड़ी के जाले की तरह उलझी हुई दास्तान, जो उसके लिये स्वयं उसके सृजनकर्ता का चैलेन्ज थी ।