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Mahasamar
Mahasamar
Series · 8 books · 1905-2014
By
Narendra Kohli
Books in series
#1
Bondage
2009
Malayalam 759 \
\
Sample Pages\
\
#2
The Return Story of Kunti
2011
‘महाभारत’ कि कथा पर आधृत उपन्यास ‘महासमर’ कि दूसरी कड़ी ‘अधिकार’ यशस्वी कथाकार नरेंद्र कोहली कि महत्वपूर्ण रचना है। इसकी कहानी हस्तीनापुर में पांडवों के शेशव से आरंभ होकर वारनावत के अग्निकांड पर जाकर समाप्त होती है। यह खंड ‘अधिकारों’ कि व्याख्या है।
#3
कर्म
2010
...
#4
धर्म
2009
प्राख्यात कथाओं का पुन:सृजन उन कथाओं का संशोधन अथवा पुनर्लेखन नहीं होता; वह उनका युग-सापेक्ष अनुकूलन मात्र भी नहीं होता। पीपल के बीज से उत्पन्न प्रत्येक वृक्ष पीपल होते हुए भी, स्वयं में एक स्वतंत्र आस्तित्व होता है; वह न किसी का अनुसरण है, न किसी का नया संस्करण ! मौलिक उपन्यास का भी यही सत्य है। मानवता के शाश्वत प्रश्नों का साक्षात्कार लेखक अपने गली-मुहल्ले, नगर-देश, समाचारपत्रों तथा समाकालीन इतिहास में आबद्ध होकर भी करता है; और मानव सभ्यता तथा संस्कृति की संपूर्ण जातीय स्मृति के सम्मुख बैठकर भी। पौराणिक उपन्यास कार के ‘प्राचीन’ में घिरकर प्रगति के प्रति अंधे हो जाने की संभावना उतनी ही घातक है, जितनी समकालीन लेखक की समसामयिक पत्रकारिता में बंदी हो एक खंड-सत्य को पूर्ण सत्य मानने की मूढ़ता। सृजक साहित्यकार का सत्य अपने काल-खंड का अंग होते हुए भी, खंडों के अतिक्रमण का लक्ष्य लेकर चलता है नरेन्द्र कोहली का नया उपन्यास है ‘महासमर’। घटनाएँ तथा पात्र महाभारत से संबद्ध हैं; किंतु यह कृति एक उपन्यास है- आज के एक लेखन का मौलिक
#5
अन्तराल
2014
इस खंड में द्यूत में हारने के पश्चात् पांडवों के वनवास की कथा है । कुंती, पाण्डु के साथ शत-श्रृंग पर वनवास करने गई थी । लाक्षागृह के जलने पर, वह अपने पुत्रों के साथ हिडिम्ब वन में भी रही थी । महाभारत की कथा के अंतिम चरण में, उसने धृतराष्ट्र, गांधारी तथा विदुर के साथ भी वनवास किया था । किन्तु अपने पुत्रों के विकट कष्ट के इन दिनों में वह उनके साथ वन में नहीं गयी । वह न द्वारका गयी, न भोजपुर । वह हस्तिनापुर में विदुर के घर पर क्यों रही ? इस प्रकार अनेक प्रश्नों के उत्तर निर्दोष तर्कों के आधार पर अंतराल में प्रस्तुत किये हैं ।
#6
प्रच्छन्न
1905
पांडवों का अज्ञातवास, महाभारत-कथा का एक बहुत आकर्षक स्थल है । दुर्योधन की गृध्र दृष्टि से पांडव कैसे छिपे रह सके ? अपने अज्ञातवास के लिए पांडवों ने विराटनगर को ही क्यों चुना ? पांडवों के शत्रुओं में प्रछन्न मित्र कहाँ थे और मित्रों में प्रच्छन्न शत्रु कहाँ पनप रहे थे ? ऐसे ही अनेक पश्नों को समेटकर आगे बढती है, महासमर के इस छठे खंड प्रच्छन्न की कथा ।
#8
निर्बंध
1905
यह कथा महाभारत युद्ध में भीष्म के घायल हो कर गिरने के बाद द्रोण के कौरव सेना के प्रधान सेनापति बनने से प्रा़रंभ होती है। युद्ध के 11वें दिन से अन्तिम दिवस एवं उसके बाद पाण्डवों के राज्य संभालने तक का विवरण इसमें है। यह महासमर कथा भाग एक - बन्धन से प्रारम्भ हो कर भाग आठ - निर्बन्ध पर समाप्त होती है। भीष्म के बन्धन में बन्धने से लेकर भीष्म के सभी बन्धनों को छोड़ने तक की कथा।
#9
आनुषंगिक
1905
Novel/ A Story of Mahabharat
Author
Narendra Kohli
Author · 16 books