इनकी ज़िंदगी में ऐसी दो घटनाएँ हुईं जिनकी वजह से इस किताब का जन्म हुआ। पहला, जब इन्होंने नौकरी छोड़कर पहाड़ों की और रुख किया और दूसरा जब रेलवे स्टेशन के बुकस्टैण्ड पर इन्हें सआदत हसन मंटो साहब की कुछ किताबें मिलीं। जहाँ पहाड़ों ने इन्हें स्थिर होना सिखाया वही मंटो की कहानियों ने वह हिम्मत दी जिसे ये कई सालों से ढूँढ रही थीं। अँग्रेज़ी में अब तक कई कहानियाँ और लेख छप चुके थे, लेकिन हिंदी में लिखने की हिम्मत अब आई। फ़िलहाल एक लेखिका होने के साथ-साथ ये एक प्रशिक्षित पर्वतारोही हैं जिसे पहाड़ों में आराम फ़रमाना और मीठी चाय बेहद पसंद है।