
भूपेंद्र जैन एक बड़ा नाम था। रुतबा और रईसी दोनों उसे विरासत में हासिल हुई थी। मगर था हद दर्जे का गुस्सैल और खब्ती इंसान, जो घर की बहुओं पर तरह तरह की पाबंदियाँ लगाये बैठा था। उसकी पुत्रवधुएँ क्या पहनेंगी और क्या नहीं पहनेंगी, उसका फैसला भी उसके बेटे नहीं बल्कि वह खुद किया करता था। बीमारियाँ उसके शरीर में स्थाई ठिकाना बना चुकी थीं, या यूँ कह लें कि वह महज अपनी दौलत के बूते पर जी रहा था। ऐसी जिंदगी जिसमें कभी भी उसकी चल चल हो जाना तय था। कायदे से ऐसे इंसान की मौत पर सवाल नहीं उठने चाहिए थे, क्योंकि मौत की वजह कॉर्डियक अरेस्ट बताई जा रही थी। लेकिन सवाल तो उठे, इसलिए उठे क्योंकि उसकी मौत कोई आम मौत नहीं थी। वह बंद कमरे में मरा था, पेट बुरी तरह फटा हुआ था और शरीर के वाईटल ऑर्गन्स चिंदी चिंदी होकर यí