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Vimal
Books in series
#1
मौत का खेल
1971
फाकाकशी करते विमल को जब शान्ता ने एक आसरा, एक सहारा ऑफर किया तो विमल को लगा जैसे उसके अच्छे दिन वाले थे । लेकिन विमल नहीं जानता था कि शान्ता ने उसे आसरा नहीं दिया था बल्कि अपने लिये एक हथियार ढूंढा था । एक ऐसा हथियार जिसे चलाकर वो अपने सारे कष्ट दूर करना चाहती थी ।अपनी सैलाब जैसी जिंदगी में ठहराव तलाशते, अपने अतीत से शर्मिंदा, वर्तमान से आशंकित और भविष्य से आतंकित महानायक सरदार सुरेन्द्र सिंह सोहल उर्फ विमल की महागाथा का पहला और अविस्मरणीय अध्याय !
#2
दौलत और खून
1971
जयशंकर ने सत्तर लाख रूपये लूटने का एक मास्टर प्लान बनाया था । एक ऐसा प्लान जिसमें उसे कामयाबी की शत-प्रतिशत गारन्टी थी बस अगर कोई कमी थी तो एक पांचवे साथी की ।बम्बई से भागकर मद्रास पहुंचा विमल जब जयशंकर से टकराया तो जैसे जयशंकर की मन की मुराद पूरी हो गयी और विमल ने फिर ना चाहते हुए भी खुद को एक जुर्म में शरीक पाया ।
#4
पैंसठ लाख की डकैती
1977
From the immensely popular Vimal Series by the master storyteller Surender Mohan Pathak We bring out the best of Surender Mohan Pathak in a five-book box set for the fans of the undisputed king of crime fiction. Painsath Laakh Ki Dakaiti, 6 Crore Ka Murda, Jauhar Jwala, Hazaar Haath and Daman Chakra are the most loved novels in the popular Vimal Series written by Pathak. They have each sold over 50,000 copies on their first release. Now we reissue them after nearly two decades. So let's brace ourselves for some perfect murders!
#5
आज कत्ल हो के रहेगा
1977
दुर-दुर ठोकर खाते, तकदीर के रहमोकरम पर जिन्दा आज तक विमल को हमेशा दोस्तों के रूप में दुश्मन ही मिले थे । लेकिन मुद्दतों बाद जब एक मुहाफिज दोस्त से मुलाकात हुई तो विमल की तकदीर को शायद उसकी जिंदगी में ये शान्ति और सुकून रास ना आया और एक बार फिर उसने खुद को न चाहते हुए भी जुर्म की दलदल में गहरे धंसते पाया ।
#7
Maut Ka Farmaan (Vimal Book 7)
1978
भाग्य की कैसी विडम्बना थी कि छ: राज्यों द्वारा घोषित इश्तिहारी मुजरिम विमल एक ऐसे अपराध की एवज में पकड़ा गया जो उसने किया नहीं था । विमल के दर्जनों अपराधों में से हर अपराध उसे फांसी के फंदे पर पहुंचा सकता था, लेकिन उसकी हकीकत से बेखबर, इन्स्पेक्टर महिपाल सिंह उससे एक ऐसी हत्या का अपराध कुबुलवाना चाहता था जो उसने की नहीं थी ।
#8
Daylight Robbery
1980
An explosive plan that's one bullet away from disaster. A grizzled old card shark who wants to pull one last job before he retires from his life of crime. A security officer with a dangerous penchant for gambling. A hot-blooded beauty who judges a man by the thickness of his wallet. An Vimal... a man so desperate for a future that he's willing to commit DAYLIGHT ROBBERY.
#11
हार जीत
1995
Another blockbuster from the very popular 42-novel-strong Vimal Series. Vimal is tired of being a convict on the loose, of drifting from one palce to another. He wishes to settle down now and live a peaceful life. But before that, he must confront his dark and devious past.
#13
मौत का नाच
1984
एक ऐसी गाथा जिसका शब्दों में वर्णन असंभव है! एक ऐसी गाथा जिसने सुरेंदर मोहन पाठक को हिंदी उपन्यासकारों का अविवादित सिरमोर बना दिया ! बखिया पुराण का दूसरा अध्याय
#14
Khoon Ke Aansoo (Vimal Book 14)
1984
अपने काले, अंधेरे अतीत से आंखें लड़ाने के बाद विमल ने पाया कि वो एक सुदृढ़, सुसंगठित आर्गेनाईजेशन को अपना दुश्मन बना बैठा था । और फिर शुरु हुई एक ऐसी जद्दोजहद जिसने पूरी बम्बई को हिला दिया । हिंदी क्राइम फिक्शन की ‘शोले’ समझी जाने वाली महागाथा का तीसरा और अंतिम अध्याय ।
#15
Jeena Yahan (Vimal Book 15)
1986
विमल ने सर्वशक्तिमान बखिया तक को तो परास्त कर डाला था लेकिन अपने प्रारब्ध से वो एक बार फिर हार गया था ! हालात ने कुछ ऐसी करवट बदली थी कि विमल को अपने जीवन के उद्देश्य और अस्तित्व पे ही सवालिया चिन्ह नजर आया, एक ऐसा चिन्ह जिसके आगे अगर कुछ दिखाई देता था तो मात्र एक शून्य जिसमें गर्त हो जाना ही उसे अपना नसीब लगता था !
Author
Surendra Mohan Pathak
Author · 132 books
Vimal
Series ·
27
books · 1971-2022
By
Surendra Mohan Pathak
#17
Chehre Pe Chehra (Vimal Book 17)
1987
महीनों की जद्दोजहद और अनगिनत जुर्मों में शामिल होने के पश्चात विमल के मन की मुराद - नया चेहरा हासिल करना - आखिरकार पूरी हो ही गयी । अपने चेहरे पर चढ़े इस नये चेहरे को उसने ‘ब्लास्ट’ के चीफ रिपोर्टर सुनील को समर्पित किया । आखिर वो सुनील ही था जिसने विमल को नयी जिन्दगी दी थी !
#18
Kismat Ka Khel (Vimal Book 18)
1987
अनथक प्रयत्नों और अनगिनत जुर्मों के फलस्वरूप विमल एक नया चेहरा पाने में आखिरकार कामयाब तो हो गया, परन्तु क्या नया चेहरा पाकर विमल ने विधाता से नयी किस्मत भी लिखवा ली थी ? क्या विमल अपने प्रारब्ध से जीत सकता था या एक बार फिर उसकी किस्मत उसे कोई नया खेल दिखाने वाली थी ।
#20
Lekh Kee Rekha (Vimal Book 20)
1990
‘कम्पनी’ के नये सरताज से झूझते, हर पल पनाह मांगते विमल की तरफ एक कानून - वो कानून जिससे वो भागता फिर रहा था - के मुहाफिज ने जब विमल की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया तो विमल विश्वास नहीं कर पाया ! कदम कदम पर दुश्मनों से घिरे विमल के लेख में ये एक नया पड़ाव था !
#21
Jahaj Ka Panchhi (Vimal Book 21)
1992
विमल के गुरुओं की सीख थी कि दीन के हित में लड़ना चाहिये, जुल्म के खिलाफ आवाज उठानी चाहिये । और फिर एक पीड़ित लड़की की हमलावर बांह की फरियाद सुनकर विमल निर्लिप्त ना रह पाया ! शीघ्र ही उसने खुद को जहाज के पंछी की भांति अपनी गुनाह से पिरोई जिंदगी के रूबरू पाया !
#23
Maut Ka Rasta (Vimal Book 23)
1992
परोपकार की भावना के तहत विमल पहले एक पीड़ित लड़की की हमलावर बांह और फिर पूरे शहर का मुहाफिज तो बन गया था लेकिन इसी भावना ने उसकी जिन्दगी से ना सिर्फ उसकी जिन्दगी का दुर्लभ ठहराव छीन लिया था बल्कि उसे जिन्दगी के एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया था जहां से हर रास्ता मौत की तरफ जाता था ।
#24
Daar Se Bichuda (Vimal Book 24)
1994
गुनाह के जहाज से उड़कर वापस जहाज पर ही पनाह पाया पंछी दिल्ली में पत्ते की तरह डाल से टूटा था और हालात की आंधी में बम्बई जाकर गिरा था ! पंछी के पास तो वापस जाने का विकल्प था भी पर क्या डाल से टूटा पत्ता भी वापस जुड़ सकता था ?
#25
Maut Ke Munh Me (Vimal Book 25)
1995
जिसकी तकदीर पत्थर की कलम से लिखी गयी हो, जिसको उसका बनाने वाला कुत्ते जैसी दुरदुर करती जिंदगी जीने के काबिल समझता हो, उसका डार से बिछुड़ने के बाद मौत के मुंह में जाकर गिरना ही अपेक्षित था !
#27
100 Karod Kee Gullak (Vimal Book 27)
1996
सौ करोड़ की विपुल धनराशि पर काबिज होने के लिये मची छीना-झपटी की सनसनीखेज दास्तान जिसमें अहम किरदार गजरे और सोहल ही नहीं और सुपर गैंगस्टर भी थे । कम्पनी को सोहल के अल्टीमेटम के नये आयाम । कम्पनी की डूबती साख, और उसके एम्पायर की ढहती दीवारों की महागाथा का दूसरा पड़ाव !
#29
Framed
1998
update
#33
चंडाल चौकड़ी
2001
"उसके सिर पर दशमेश पिता का हाथ है ! वो काल पर फतह पाया, पीर-पैगम्बरों जैसी सलाहियात वाला मायावी है ! उसके हज़ार हाथ हैं ! वो अकेला ही सवा लाख है !" ये थे विमल के दुश्मनों के उसके प्रति उद्गार
#34
Sher Savaari (Vimal Book 34)
2001
"अनजाने में शेर सवारी कर बैठा हूँ ; अब न चढ़ते बनता है, न उतरते बनता है ! चढा रह नहीं सकता, उतरूंगा तो शेर खा जाएगा !" क्या शेर का निवाला बनना ही विमल की नियति है?
#39
चेम्बूर का दाता
2011
मैं ही मुंसिफ मैं ही मुजरिम कोई सूरत नहीं रिहाई की। ये था विमल उर्फ सरदार सुरेन्द्र सिंह सोहल का खुद अपना आकलन लेकिन अपने मुरीदों के लिए वो था चैम्बूर का दाता
#41
सदा नगारा कूच का
2011
सबका तो मदावा कर डाला, अपना ही मदावा कर न सके सबके तो गिरेबां सी डाले, अपना ही गिरेबां भूल गए. ये थी विमल की ट्रेजेडी जिसके आगे वो बेबस था.
#42
जो लरै दीन के हेत
2014
From the king of Hindi crime fiction Two big suitcases have been lying around at Sanjeev Chawlas place in New Delhi. They belong to Sanjeevs friend Khanna, who was brutally murdered inside his own house over a year ago. The suitcases connect two criminals, Garewal and Kaul to Sardar Singh Sohal aka Vimal, albeit at daggers drawn. Meanwhile, Vimal has found another nemesis in Mumbai, druglord Michael Huan, who wants to control the drug peddling business in the city. With half of the Mumbai underworld conspiring against Vimal, he now has to put up the toughest fight ever.
#43
Qahar
2019
Qahar is a story of Vimal, who promised himself that he would move to Delhi and live a normal life as a family man with his wife and child; erasing every memory of his haunting past. He promised to forget that he had spent his life scraping bloody words into the wall of time. But one day, a whirlwind puts a sudden end to the calm before the storm and he is blown away like a twig. When he opens his eyes, he finds himself in that place where he promised never to venture again. This is 43rd book of SMP s bestselling series Vimal.
#44
Jaa Ke Bairi Sanmukh Jeevay
2019
I am a khalsa of Waheguru. I am the Guru's lion. I'll thunder like the clouds and in the same booming voice, I will unleash havoc on my enemies. My enemies will tremble at my challenge. My scream will rain like cinders upon them.' _Jaake Bairi Sanmukh Jeevay, Taake Jeevan Ko Dhikkar_ This electrifying novel will quake the gentle human sensibilities. The 44th mystery in the Vimal series this is a brand-new gem from the stellar mystery author, Surendra Mohan Pathak.
#46
Gang of Four
2022
जो गम हद से ज्यादा हो, खुशी नजदीक होती है, चमकते हैं सितारे, रात जब तारीक होती है। जब नाम सोहल हो तो गिर गिर के संभलना पड़ता है। तो मर मर के जीना पड़ता है। कदम लड़खड़ाते हों तो भी मजबूती से पैरों पर खड़ा होना पड़ता है। नीलम की मौत ने उसके वजूद का पुर्जा पुर्जा बिखेर दिया था तो भी अपनी व्यक्तिगत त्रासदी से उबरना लाज़िम था। हँस कर दिखाना जरूरी था भले ही दिल रोता हो।