
Kindle की फ्री स्मार्टफोन ऐप्लिकेशन पर अब कहीं भी पढ़िए, कभी भी पढ़िए। ‘मैं कौन हूँ’ में स्वामीजी ने सरल शब्दों में एक आम आदमी के उन सवालों के जवाब दिए हैं, उन जिज्ञासाओं को शांत करने का प्रयास किया है जिनमें वह अकसर उलझ कर रह जाता है - कि आखिर वह है कौन? ये आत्मा-परमात्मा कौन हैं? स्वयं को कैसे जाना जा सकता है? उसके जीवन का उद्देश्य क्या है? धर्म का जीवन में क्या महत्त्व है? जीवन की सार्थकता क्या है? ऐसे ही अनेक सवालों और जिज्ञासाओं की प्रतिपूर्ति करने वाली एक प्रेरक और ज्ञानवर्द्धक पुस्तक।